Wednesday, September 18, 2019

भारतीय संविधान - स्वतंत्रता का अधिकार अनुच्छेद 19 से 22 तक

 भारतीय संविधान 

अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता का अधिकार

 भारतीय संविधान

Artical 19 to Artical 22

  • अनुच्छेद 19 प्रेस की स्वतंत्रता – अनुच्छेद 19 में 6 प्रकार की स्वतंत्रता है ।
  • a) बोलने की स्वतंत्रता
  • b) शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्रित होने का अधिकार एवं निरायुध्द सम्मेलन का अधिकार
  • c) संघ बनाने की स्वतंत्रता 
  • d) भारत के राज्य क्षेत्र मे सब जगह घूमने की स्वतंत्रता
  • e) भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निवास करने में और बस जाने की स्वतंत्रता
  • f) कोई भी ब्यापार एवं जीविका चलाने की स्वतंत्रता
नोट : प्रेस की स्वतंत्रता का वर्णन अनुच्छेद – 19 (a) मे है ।
  •  अनुच्छेद 20 अपराधी ठहराए जाने पर सरक्षण किया गया है -
  1. किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी ।
  2. अपराध करने के समय जो कानून है उसी के तहत सजा मिलेगी न कि पहले और बाद मे बनने वाले कानून के तहत ।
  3. किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरूद्ध न्यायलय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 21 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार – किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
  •  अनुच्छेद - 21 से संबन्धित मुददे - 
  1. ए. के. गोपाल केस 1955 -  इस केस मे सुप्रीम कोर्ट ने जीवन के आधार को संकुचित व्यख्या की तथा केवल जीवन जीने को ही जीवन के अधिकार के अंतर्गत सम्मिलित माना है। 
  2.  मेनका गांधी केस 1978 - इस केस मे सुप्रीम कोर्ट ने जीवन के अधिकार को विस्तार से व्यख्या की एवं गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार को जीवन के अधिकार में सम्मिलित माना है। समय के साथ गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में कई अन्य अधिकारों को सम्मिलित किया गया है।
  • उदाहरण -  आवास प्राप्त करने का अधिकार, सुरक्षित वातावरण प्राप्त करने का अधिकार (चमेली सिंह केस) विदेश यात्रा का अधिकार 
  • अनुच्छेद – 21A  शिक्षा का अधिकार - 86 वें संविधान सशोधन 2002 के द्वारा इसे संविधान में सम्मिलित किया गया है । 6 से 14 वर्ष की उम्र के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाएगी ।
  • अनुच्छेद 22 मनमानी गिरफ्तारी एवं निवारक नज़बंदी में संरक्षण –
अनुच्छेद 22 के 2 भाग है -
1.साधारण कानूनी मामले मे प्रावधान
2.निवारक निरोध से संबन्धित प्रावधान

1.साधारण कानूनी मामले मे प्रावधान  इस अनुच्छेद के अनुसार जब कोई व्यक्ति साधारण कानून के तहत गिरिफ़्तार किया जाता है तो उसे गिरिफ़्तार करने के आधार एवं कारणो से परिचित कराया जाता है जिसके आधार पर उसे गिरिफ़्तार किया गया है ।
2.उसे अपनी रुचि के अनुसार वकील से परामर्श करने और प्रति रक्षा कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है ।
3.उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर निकटतम न्यायलय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए ।
Øनोट – यह सरक्षण विदेशी शत्रु एवं निवारक निरोध के अंतर्गतगिरफ्तार व्यक्ति को प्राप्त नहीं होगा।
qअनुच्छेद 22 का दूसरा भाग निवारक निरोध राज्य के अधीन एक सर्वाधिक शक्ति है, जिसके तहत राज्य किसी ब्यक्ति को को संभावित अपराध करने से रोकने के लिए हिरासत मे ले सकता है । निवारक निरोध के संबंध मेन संविधान के अनुच्छेद 22(3) के तहत यह प्रावधान है की यदि किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के तहत गिरफ्तार किया जाता है तो उसे अनुच्छेद 22(1) और अनुच्छेद  22((2) के तहत प्रपट गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ संरक्षण का अधिकार प्राप्त नहीं होगा । साथ ही उस व्यक्ति को अनुच्छेद 19 तथा अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान की गई स्वतन्त्रताएँ भी प्राप्त नहीं होगी । 



राज्य द्वारा किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के तहत निम्नलिखित चार आधारों पर ही गिरफ्तार किया जा सकता है –
1.राज्य की सुरक्षा
2.सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना ।
3.आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति और रखरखाव तथा रक्षा ।
4.विदेशी मामलों या भारत की सुरक्षा ।
Øहाल ही में तेलंगाना राज्य के एक बीज निर्माता को जब गरीब किसानों को नकली मिर्च के बीज बेचने के आरोप में ‘निवारक निरोध’  कानून के अंतर्गत राज्य प्राधिकार ने हिरासत में लिया, तब सर्वोच्च न्यायालय ने निवारक निरोध के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की व्याख्या की ।
Øसर्वोच्च न्यायलय ने सामान्य कानूनी प्रकिया से हो सकने वाली कार्यवाही में ‘निवारक निरोध’ के प्रयोग को गैर कानूनी बताया । न्यायलय ने कहा कि अगर सामान्य कानूनों क तहत पर्याप्त उपाय उपलब्ध हो तो राज्य को ‘निवारक निरोध’ का प्रयोग करने से बचना चाहिए क्यों कि किसी व्यक्ति को हिरासत मेन लेना ‘नागरिक स्वतन्त्रता’ को प्रभावित करने वाला एक गंभीर मामला होता है । किसी व्यक्ति को निवारक निरोध के तहत हिरासत मे रखने से प्राधिकारी को व्यक्तिगत संतुष्टी मिल सकती है परंतु, ऐसा करने से संविधान के अनुच्छेद – 14,19,21 और 22 मे वर्णित मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है ।

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