Thursday, August 15, 2019

73 Independence Day - 15 अगस्त, 2019 स्वतंत्रता दिवस

73 Independence Day - 15 अगस्त, 2019 स्वतंत्रता दिवस 

73 Independence Day


स्वतंत्रता दिवस  (15 अगस्त1947) से सम्बंधित मत्वपूर्ण जानकारी 


भारत इस साल 15 अगस्त को अपना 73वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाएगा | 15 अगस्त और 26 जनवरी भारतीयों  के दिल में बसा एक ऐसी तारीख है जिसकी तुलना अन्य किसी दिन से नहीं की जा सकती है | लेकिन क्या आप जानते है की भारत को आजादी मिलने के लिए किसी और तारीख पर सहमती बनी थी | परन्तु अंग्रेजों ने अपनी चाल को सफल बनाने के लिए इसे  बदलवा दिया | लेकिन इंडिया इंडिपेंडेंस बिल के अनुसार ब्रिटिश प्रशासन ने सत्ता हस्तांतरण के लिए 3 जून 1948 की तारीख तय की गई थी | परन्तु  ब्रिटिश के प्रधानमंत्री केल्मेंट रिचर्ड एटली 1947 में  घोषणा की थी की सरकार 3 जून 1948 से भारत को पूर्ण आत्म प्रशासन का अधिकार प्रदान करेगी | लेकिन माउन्टबेटन के परिद्रश्य में आने के बाद सब कुछ बदल गया | लुई माउन्टबेटन को  1947 में भारत का आखिरी वायसराय चुन लिया गया | लुई माउन्टबेटन पहले पड़ोसी देश बर्मा के गवर्नल हुआ करते थे | उन्हें व्यवस्थित तरीके से भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की जिम्मेदारी भी दे दी गई थी |


आखिर क्यों 15 अगस्त 1947 को देश स्वत्रंत हुआ -

कुछ इतिहासकरों का मानना है की  लुई माउन्टबेटन ब्रिटेन के लिए 15 अगस्त की तारीख को शुभ मानता था | क्योंकी द्वतीय विश्व युद्ध के वक्त जब 15 अगस्त 1945 को जापान के सेना ने आत्मसमर्पण किया था , तब लुई माउन्टबेटन अलाइड फोर्सेस का कमांडर हुआ करता था | इसलिए  लुई माउन्टबेटन  ने ब्रिटिश प्रशासन से बात करके भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की तिथि 3 जून 1948 से 15 अगस्त 1947 कर दी |
लेकिन वहीँ दुसरे इतिहासकार धड़े का तर्क ज्यादा पुष्ट मालूम पड़ता है | भारत को 3 जून 1948 के बजाय 15 अगस्त 1947 को ही सत्ता हस्तांतरित करने का एक कारण और भी बताया जाता है की ब्रिटिशों को इस बात का पता लग चूका था की मोहम्मद अली जिन्ना को कैंसर था और वो ज्यादा दिन जिन्दा नहीं रहेंगे | इसी को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजों को चिंता थी की अगर जिन्ना नहीं रहे तो महात्मा गाँधी अलग देश न बनने के प्रस्ताव पर मुसलमानों को मना लेंगे |

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मोहम्मद अली जिन्ना के मरने के डर से हुआ ये सब -

असल में जिन्ना ही वह चेहरा थे जिनकों आगे रखकर ब्रिटिशों ने भारत को दो टुकड़ों में बाटने की साजिश रची थी और देश में ब्रिटिशों ने ऐसा हिन्दू - मुस्लिम ध्रुवीकरण किया जिसकी आग सदियों तक नहीं मिटने वाली थी | अगर जिन्ना की म्रत्यु ब्रिटिशों के प्लान के पूरा होने से पहले हो जाती तो उन्हें मुश्किल आ सकती थी | हम आप को बता दे कि 15 अगस्त ब्रिटिशों के लिए शुभ दिन था क्यों की इस दिन ब्रिटेन और मित्र राष्ट्रों ने जापान को आत्मसमर्पण करवाकर द्वतीय विश्वयुद्ध जीता था इसलिए इस दिन भारत को सत्ता हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया | अंततः 15 अगस्त 1947 को ब्रिटेन ने भारत को सत्ता हस्तांतरित कर दिया और जैसा की अंग्रेजों को अंदेशा था यह सब हो जाने के कुछ महीने बाद मोहम्मद अली जिन्ना  की म्रत्यु हो गई |

लुई माउन्टबेटन  की म्रत्यु -

बटवारे के समय लुई माउन्टबेटन के नेत्रत्व में भारत - पकिस्तान में जो कत्लेआम हुआ था उसकी सजा उन्हें बाद में ही सही लेकिन भुगतनी जरूर पड़ी | 27 अगस्त 1979 को लुई माउन्टबेटन के घर में उसके परिवार के कुछ सदस्यों के साथ बम से मार दिया गया | लुई माउन्टबेटन की हत्या का आरोप आयरलैंड की आयरिश रिपब्लिकन आर्मी पर लगा जो की वर्षों से स्वाधीनता के लिए संघर्षरत थी  


सच तो यह है की साल 1930 से ही कांग्रेस स्वतन्त्रता दिवस मनाने के लिए 26 जनवरी के दिन का चयन कर चुकी थी |
स्वतन्त्रता दिवस (independence  of india) हर वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है | 1947 में इसी दिन भारत के निवासियों ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त की थी | यह भारत का रास्ट्रीय त्यौहार है | हर साल इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते है | 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर भारतीय रास्ट्रीय ध्वज फहराया था | स्वतंत्रा के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया जिसमे भारत और पकिस्तान का उदय हुआ | बिभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और साम्प्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएँ हुई | देश विभाजन के  कारण मनुष्य जाती के इतिहास में इतनी संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ | यह संख्या लगभग 1.45 करोड़ की थी | भारत की जनगणना 1951 के अनुसार विभाजन के बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पकिस्तान गए और 72,49,000 हिन्दू और सिख पकिस्तान छोड़कर भारत आए |
15 अगस्त 1947 को झंडा फहराने के साथ - साथ परेड और संस्कृतिक कार्यक्रम पूरे भारत में मनाया जाता है |

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